पीएम-कुसुम योजना (PM-KUSUM): भारतीय खेती के लिए ‘ऊर्जा क्रांति’ और किसानों की आय बढ़ाने का मार्ग
भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहाँ आज भी करोड़ों किसानों की आजीविका खेती पर निर्भर है। लेकिन भारतीय खेती के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिंचाई की रही है। डीजल की बढ़ती कीमतें और बिजली की अनिश्चित आपूर्ति ने खेती की लागत को बढ़ा दिया है। इसी समस्या के समाधान के रूप में भारत सरकार ने प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (PM-KUSUM) की शुरुआत की।
वर्ष 2025 तक, यह योजना न केवल किसानों को मुफ्त बिजली प्रदान कर रही है, बल्कि उन्हें ‘अन्नदाता’ से ‘ऊर्जादाता’ बनाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम साबित हुई है।
पीएम-कुसुम योजना क्या है?
पीएम-कुसुम योजना नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) द्वारा शुरू की गई एक महत्वाकांक्षी योजना है। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को सौर ऊर्जा (Solar Energy) का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना है। इस योजना के तहत किसानों को अपने खेतों में सोलर पंप लगाने और खाली जमीन पर छोटे सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने के लिए भारी सब्सिडी दी जाती है।
यह योजना मुख्य रूप से तीन लक्ष्यों पर केंद्रित है:
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डीजल पंपों पर निर्भरता को कम करना।
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किसानों को दिन के समय सिंचाई के लिए विश्वसनीय बिजली प्रदान करना।
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किसानों की बंजर जमीन से कमाई के नए स्रोत पैदा करना।
योजना के तीन मुख्य घटक (Components)
पीएम-कुसुम योजना को तीन भागों में विभाजित किया गया है, ताकि हर प्रकार के किसान इसका लाभ उठा सकें:
| घटक | विवरण | मुख्य लाभ |
| घटक-ए (Component A) | सौर ऊर्जा संयंत्र | बंजर भूमि पर 500 किलोवाट से 2 मेगावाट तक के सोलर प्लांट लगाना। |
| घटक-बी (Component B) | स्टैंडअलोन सोलर पंप | ग्रिड से दूर वाले क्षेत्रों में पुराने डीजल पंपों की जगह नए सोलर पंप लगाना। |
| घटक-सी (Component C) | ग्रिड-कनेक्टेड पंपों का सौरीकरण | मौजूदा बिजली वाले पंपों को सोलर से जोड़ना और अतिरिक्त बिजली बेचना। |
1. बंजर भूमि से कमाई (घटक-ए)
यदि किसी किसान के पास ऐसी भूमि है जहाँ खेती नहीं हो पा रही है, तो वह वहां सौर ऊर्जा संयंत्र लगा सकता है। इससे उत्पन्न होने वाली बिजली को स्थानीय बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) द्वारा खरीदा जाता है। यह किसानों के लिए 25 वर्षों तक एक निश्चित मासिक आय सुनिश्चित करता है।
2. डीजल के खर्च से मुक्ति (घटक-बी)
भारत के कई हिस्सों में अभी भी बिजली के तार नहीं पहुंचे हैं। वहां किसान महंगे डीजल पंपों का उपयोग करते हैं। इस योजना के तहत उन्हें 7.5 HP (हॉर्सपावर) तक के स्टैंडअलोन सोलर पंप दिए जाते हैं। इससे सिंचाई का खर्च शून्य हो जाता है।
3. बिजली बेचकर मुनाफा (घटक-सी)
जिन किसानों के पास पहले से बिजली कनेक्शन वाले पंप हैं, वे उन्हें सोलर पैनल से जोड़ सकते हैं। दिन में किसान सोलर ऊर्जा से सिंचाई करेंगे और अगर बिजली बचती है, तो उसे सरकार वापस खरीद लेगी।
सब्सिडी का गणित: 90% तक की छूट
पीएम-कुसुम योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सब्सिडी संरचना है। सरकार यह सुनिश्चित करती है कि किसान को अपनी जेब से बहुत कम पैसा खर्च करना पड़े।
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केंद्र सरकार की सब्सिडी: बेंचमार्क लागत का 30%।
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राज्य सरकार की सब्सिडी: बेंचमार्क लागत का 30% (कुछ राज्यों में यह 60% तक भी होती है)।
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बैंक ऋण: किसान लागत का 30% हिस्सा बैंक से ऋण के रूप में ले सकते हैं।
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किसान का हिस्सा: किसान को कुल लागत का केवल 10% भुगतान करना होता है।
उदाहरण के लिए: यदि एक सोलर पंप की कीमत 2 लाख रुपये है, तो केंद्र और राज्य सरकार मिलकर 1.20 लाख रुपये की सब्सिडी देंगी। किसान को केवल 20,000 रुपये नकद देने होंगे और शेष राशि के लिए बैंक लोन मिल सकता है।
योजना के लाभ और महत्व
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पर्यावरण संरक्षण: सोलर पंपों के उपयोग से डीजल की खपत कम होती है, जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है। यह भारत के ‘नेट जीरो’ लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक है।
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लागत में कमी: सिंचाई खेती का सबसे महंगा हिस्सा है। सोलर पंप लगने के बाद बिजली या डीजल का मासिक खर्च पूरी तरह समाप्त हो जाता है।
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दिन में सिंचाई की सुविधा: बिजली की कमी के कारण किसानों को अक्सर रात में खेतों में पानी देना पड़ता है, जो जोखिम भरा होता है। सोलर पंप से दिन की रोशनी में कभी भी सिंचाई की जा सकती है।
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आय का अतिरिक्त साधन: किसान अपनी खाली जमीन से बिजली पैदा कर सरकार को बेच सकते हैं, जिससे उनकी वार्षिक आय में ₹50,000 से ₹1,00,000 तक की वृद्धि हो सकती है।
आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज
योजना का लाभ लेने के लिए किसान के पास निम्नलिखित दस्तावेज होने अनिवार्य हैं:
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आधार कार्ड: पहचान और पते के प्रमाण के लिए।
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भूमि दस्तावेज: जमीन की खतौनी या जमाबंदी।
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बैंक खाता: सब्सिडी सीधे बैंक खाते में (DBT) जमा करने के लिए।
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पासपोर्ट साइज फोटो और मोबाइल नंबर।
आवेदन प्रक्रिया (How to Apply)
पीएम-कुसुम योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है। साल 2025 में अधिकांश प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी गई है:
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आधिकारिक पोर्टल: सबसे पहले अपने राज्य की ऊर्जा विकास एजेंसी (जैसे उत्तर प्रदेश में UPNEDA, राजस्थान में RRECL) की वेबसाइट पर जाएं।
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पंजीकरण: पोर्टल पर ‘PM-KUSUM Registration’ पर क्लिक करें और अपनी जानकारी भरें।
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दस्तावेज अपलोड: भूमि के कागज और आधार कार्ड की स्कैन कॉपी अपलोड करें।
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भुगतान: आवेदन स्वीकृत होने के बाद, किसान को अपना 10% हिस्सा ऑनलाइन या डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से जमा करना होता है।
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स्थापना: भुगतान के कुछ ही दिनों के भीतर सरकारी अधिकृत वेंडर आपके खेत में सोलर पंप की स्थापना कर देते हैं।

